Sunday, October 18, 2009

मैं पागल हूं............................।
कौन कहता है कि हम एक सच्चे और संवैधानिक लोकतंत्र के वाशिंदे हैं। मुझे या मेरे जैसे और लोगों को तो यह नहीं दिखता। बिहार में एक व्यक्ति अपनी बच्ची की शादी के लिए सबकुछ बेच देता है। वहीं किसी जनप्रतिनिधि की बेटी की शादी में पैसे नाली में बहते हैं। किसी के जूठन की कीमत हजार रुपये से ज्यादा होती है। किसी की मंथली आमदनी भी हजार रुपये नहीं है। ग्रामीण इलाकों के मुसहर जाति के लोग तो आज भी धान कटे खेतों से चुहें निकालकर खाते हैं। बिहार के सिमांचल इलाके में हजारों एकड़ जमीन भूमाफियाओं ने कब्जे में रखा है। पूर्णियां के एक ईलाके में आज भी जमींदारों द्वारा पोलिया और संथाली मूल के आदिवासियों का खुलेआम यौनशोषण किया जाता है। किशनगंज जिले के बहादूर गंज स्टेट हाईवे के किनारे प्रेम नगर नाम की एक बस्ती है। जहां 12 से 14 साल की बच्चिय़ां जिस्म का सौदा कर घर का चुल्हा जलाती हैं। पूरे जिले में भ्रष्टाचार का आलम है। हम उस देश के वासी हैं जहां बलात्कार और हत्या के आऱोपी भी हमपर शासन करते हैं। गत लोकसभा में सांसदों के चरित्रों पर निगाह डालने पर सारी बातें क्लियर हो जाएगीं। एक बार तो एक बलात्कारी और हत्यारा गृह राज्य मंत्री बन बैठा। वो तो भला हो अरुण शौरी के उस लेख का कि देवगौड़ा ने उनसे इस्तीफा ले लिया। लेकिन यह एक उदाहरण है। कितने भईया और बाहुबली...संसद के पवित्र सदन में लोकतंत्र की गरिमा को कंलकित कर आम लोगों का विश्वास लोकतंत्र से उठा चुके हैं। कौन सी आजादी जहां एक बच्चे पर महीने में लाखों रुपये खर्च होते हैं.........और दूसरा आग की भठ्टी और चौराहे पर पड़ी गंदगी में अपने जीवन के सपने तलाशता है।
कौन सी योजना किसी गरीब का हेल्प कर रही है। जरा बताएंगे। ज्यादा दूर नहीं सुशासन बाबु के मुख्यालय से मात्र 116 किलोमीटर दूर बक्सर जिले में नरेगा में सभी पैसे मुखिया और दलाल खा गये। हजार की जगह किसी को तीन सौ किसी को दो सौ मिलता है। पूछना हो तो कोरान सराय पंचायत के कचईनियां गांव के मुन्ना साव, बबन पासवान, कैलाश पासवान और बाकी गांववालों से पता किजिए। सच्चाई सामने आ जाएगी। बिनायक सेन जैसा डाक्टर जो डाक्टरी छोड़कर बेचारे मजलूमों की सेवा कर रहे थे..कई महीने तक पब्लिक सेफ्टी एक्ट के नाम पर जेल में रहे। केंद्र सरकार और छतीसगढ़ की सरकार ने उन्हें नक्सलियों से संबंध के आरोप में जेल में ठुस दिया था । अब इन कु...........त....को कौन समझाए कि उन्ही की गलत नीतियों की वजह से किसी स्टेट में विकास है तो कहीं पीने का साफ पानी तक नहीं। राज्य के विकास में भी ये अपने पार्टी की सरकार होना मांगते हैं। अरे इन्हे सरेआम चौराहे पर खड़ा करके.................मार देनी चाहिए।
समानता की तो इनलोंगों ने बखिया उधेड़ डाली है। किसी के मकान पर हेल्लिकाप्टर उतारा जा सकता है। दिन रात अपार्टमेंटों के बनने का सिलसिला जारी है। उतनी ही तेजी से लोग सड़कों पर सोने लगे हैं। कल तक बिहार की राजधानी पटना में केवल स्टेशन के आसपास के फुटपाथ पर रात में सोये हुए रिक्सेवाले दिखते थे। अब तो गंदे इलाकों और नाला रोड जैसे फुटपाथ पर सोने के लिए मारामारी मची रहती है। हर कहीं हर कोई अपने हिसाब और पद के मुताबीक भ्रष्टचार के आकंठ तक डूबा हुआ है । हर कोई लूटने में लगा है। लूटो लूटो.............बात तो इस मौके पर याद आ गई लार्ड माउंटबेटन के उस मदाड़ी वाले की जिसका जमूरा.....आजादी के दूसरे दिन लूटियनस् हाउस के सामने मदारी दिखा रहा था.....माउंटबेटन उस समय देश छोड़कर एडविना के साथ जा रहे थे...लेकिन मदारी देखकर थोड़ा रुक गये। मदारी वाला अपने जमूरे से पूछ रहा था। जमूरे ये बता..इस देश पर आतंरिक गद्दारों का फायदा उठाकर, स्वार्थी लोगों के दामन में बैठकर अंग्रेजों ने देश पर दो सौ साल तक राज किया। अब बता बे...... इस देश को गोरे छोड़कर जा रहे हैं......अब कौन राज करेगा। जमूरे ने कहा...सरदार चिंता मत करो राज तो अंग्रजों का ही रहेगा ....लेकिन कलर में ड्रिफेंस रहेगा वो गोरे थे ये साले काले होंगे।वहीं हो रहा है काले अंग्रजों ने देश को गुलाम बना रखा है हर कोई चूस रहा है। काट रहा है। जहां से जिसे मौका मिलता है देश को खोखला कर रहा है। यदि हम झूठ ही हैं तो फिर ये रिपोर्ट कैसे आ गई। जरा देखिए एक रिपोर्ट का कुछ अंश.....केंद्र सरकार द्वारा जारी नेशनल सैम्पल सर्वें आर्गनाईजेशन की रिपोर्ट के मुताबिक अब भी ग्रामीण आबादी का पांचवा हिस्सा मात्र 12 रुपये में रोजाना जीवन जीने को अभिशप्त है। ग्रामीणों की आय का आधा से ज्यादा हिस्सा यानि एक रुपये में 35 पैसे भोजन जुटाने में खर्च हो जाते हैं । इन तथ्यों के आईने में जब बिहार के किसी चौराहे पर सुबह सबेरे नजर पड़ती है तो सार पिक्चर क्लियर हो जाता है। पटना, मुज्फ्फरपुर, भागलपुर और गया जैसे छोटे शहरों में मजदूरों की रोजाना बोली लगती है। हाए रे इंडिया..केवल इसे भारत ही रहने दो चोटों ..क्यों चिकोटी काट कर इसे घायल कर रहे हो।
अबे देश के तथा कथित नीति निर्धारकों जरा नजर डालों इन आकंड़ों पर और देखों अपने आपको आईने में और पूछों अपनी आत्मा से क्या लोकतंत्र को तुम मां की गाली नहीं देते हो......................।
सतर करोड़ अबादी को रोजाना औसत 20 रुपये में अपना जीवन बसर करना पड़ता है।39 करोड़ लोग अब भी गरीबी रेखा के नीचे हैं। साठ करोड़ लोगों को पीने का साफ पानी नहीं मिल पाता। 35 करोड़ की अबादी प्राथमिक शिक्षा से वंचित है। तुम गद्देदार बिस्तर पर सोते हो...बासठ करोड़ लोगों के पास अपना घर नहीं है। तुम अपने घरों में सोते हो...20 करोड़ लोग शहरों में फूटपाथ पर सोते हैं और 15 करोड़ लोगों की जिंदगी मुआवजों पर टिकी है। चेहरे से पसीना पोछकर मजदूरी कर पेट पालते लोगों की आय तो कुछ नहीं ...दरवाजे पर वोट मांगकर राजनीति से जुड़े तुम चुट्टों की औसत आय सलाना 9 लाख रुपये है। तुम संसद में जाते हो हमारे लिए लेकिन तुम्हारी संपति में 227 से 1000 फिसदी तक का ईजाफा हो जाता है। मैं, हम , तुम्हारा समाज, देश तुम्हारी वजह से तिल तिल कर जल रहा है...अब तो इसे छोड़ दो.....................।
आशुतोष जार्ज मुस्तफा।

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